अगली सुनवाई में पेश हों': दिल्ली के संरक्षित स्मारकों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; ASI निदेशक को अवमानना नोटिस जारी
RGANews Delhi
दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण को लेकर शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित समय में पूरी जानकारी न देने पर एएसआई प्रमुख से जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया है। अदालत ने यह भी पाया कि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा स्मारकों की निगरानी और सर्वे का काम अधूरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के संरक्षित स्मारकों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 173 अधिसूचित हेरिटेज साइट्स की स्थिति पर जवाब दाखिल न करने को आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन माना।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एएसआई के महानिदेशक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि उन्हें कारण बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
पुरातत्व विभाग को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने 19 स्मारकों की पहचान कर उनका निरीक्षण किया है, लेकिन कई पहलुओं पर केवल सामान्य जानकारी दी गई है। कोर्ट ने विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें प्रत्येक स्मारक के लिए उठाए गए कदमों और ताजा तस्वीरों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर भी अदालत ने नाराजगी जताई। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने 85 में से केवल 62 स्मारकों का सर्वे किया है, जबकि नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने 54 में से सिर्फ 2 स्मारकों का निरीक्षण किया है। कोर्ट ने दोनों संस्थाओं को भी विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया।
संरक्षित स्मारकों में अतिक्रमण से जुड़ा है मामला
यह मामला याचिकाकर्ता राजीव सूरी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें डिफेंस कॉलोनी स्थित लोदीकालीन स्मारक गुमटी ऑफ शेख अली पर अतिक्रमण का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने संकेत दिया कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए आगे और निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत रिपोर्ट और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राजधानी के संरक्षित स्थलों की स्थिति स्पष्ट हो सके और उनके संरक्षण में सुधार किया जा सके।
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