लखनऊ: अधिवक्ताओं के सम्मान की लड़ाई बनी सियासी संग्राम,अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
संक्षिप्त :लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबरों पर हुई कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे वकीलों के सम्मान और आजीविका पर हमला बताते हुए संघर्षरत अधिवक्ताओं के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबरों पर हुई कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद ने प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सत्ता के नशे में “लोकतंत्र की आवाज़ को कुचलने” का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने अधिवक्ताओं के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभालते हुए कहा कि न्याय की लड़ाई लड़ने वालों पर लाठियां बरसाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है।
“चैंबर नहीं, वकीलों की रोज़ी-रोटी पर चला बुलडोज़र”
अखिलेश यादव ने कहा कि एक अधिवक्ता का चैंबर उसके लिए केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक होता है। वहीं से वह न्याय की मशाल जलाकर समाज के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बुलडोज़र केवल ईंट-पत्थरों पर नहीं चलाया, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी “गाज गिरा दी”। सपा प्रमुख ने कहा कि यह कार्रवाई अधिवक्ताओं के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है।
लाठी की चोट से ज़्यादा गहरी है अपमान की पीड़ा : अखिलेश यादव
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुरुष और महिला अधिवक्ताओं पर हुई सख्ती ने पूरे वकील समाज को आहत किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल शारीरिक बल प्रयोग का मामला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचाने की घटना है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को ही “कटघरे में खड़ा” करने में जुटी है, जबकि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।
“अगर वकील ठान लें तो सत्ता की परतें खुल जाएंगी”
अखिलेश यादव ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि अधिवक्ता समाज यदि किसी मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ा हो जाए, तो सत्ता के गलियारों में छिपे कई राज़ सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानून की बारीकियों को समझने वाला वर्ग अन्याय को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करता। सपा प्रमुख ने कहा कि अगर अधिवक्ताओं ने आवाज़ बुलंद कर दी तो “दूध का दूध और पानी का पानी” होते देर नहीं लगेगी।
“भाजपा पर न्याय विरोधी मानसिकता का आरोप”
सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर न्याय विरोधी सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो सरकार संघर्ष करने वालों की आवाज़ दबाने का प्रयास करती है, वह लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा, किसान, कर्मचारी और अब अधिवक्ता समाज भी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। अखिलेश ने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर “जनता जनार्दन” अपना फैसला जरूर सुनाएगी।
“पीड़ा से पैदा हो रहा राजनीतिक प्रतिरोध”
अपने संदेश में अखिलेश यादव ने “पीड़ा बढ़ रही, इसलिए पीडीए बढ़ रहा है” का नारा दोहराते हुए विपक्षी एकजुटता का संकेत भी दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी हर संघर्षरत और पीड़ित अधिवक्ता के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को आने वाले समय की बड़ी सियासी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
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