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कांग्रेस का दावा- एफसीआरए संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने की कोशिश में BJP, सांसदों ने जारी किए निर्देश

केंद्र सरकार विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन (एफसीआरए) विधेयक पेश करने जा रही है। ऐसे में कांग्रेस ने अपने सांसदों को तुरंत दिल्ली पहुंचने और संसद सत्र में शामिल होने का निर्देश दिया है।  

कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि भाजपा संसद में एफसीआरए संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने की योजना बना रही है और कहा कि वह इस स्पष्ट रूप से असांविधानिक और कठोर विधेयक को पारित नहीं होने देगी। कांग्रेस के संगठन प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी सांसदों को तत्काल दिल्ली पहुंचने और बुधवार को संसद में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन का विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसमें सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि विदेशी धन के माध्यम से जबरन धर्म परिवर्तन में लिप्त व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा।

वेणुगोपाल ने इस प्रस्तावित कानून को पूरी तरह 'असांविधानिक' बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इसे ऐसे समय में लाने की कोशिश कर रही है, जब जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, वहां के सांसद चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।

'एनजीओ और सामुदायिक संगठनों को होगा नुकसान'
उन्होंने दावा किया कि विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन (एफसीआरए) विधेयक से खासकर उन एनजीओ और सामुदायिक संगठनों को नुकसान होगा, जो अल्पसंख्यक समुदायों  चलाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी हालत में इस विधेयक को पारित नहीं होने देगी।

'विधेयक के खिलाफ संसद के बाहर प्रदर्शन करेगी कांग्रेस'
कांग्रेस नेता ने यह भी घोषणा की कि पार्टी इस विधेयक के खिलाफ बुधवार सुबह साढ़ें 10 बजे संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगी। वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर आरोप लगाया कि वे शांति से रह रहे लोगों को बांटने और उनके बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ऐसे ही प्रयासों का एक नया उदाहरण है।

'ईसाई संस्थानों को नियंत्रित करने की साजिश'
वेणुगोपाल ने इस विधेयक को अल्पसंख्यक समुदायों पर मंडराता खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह संगठनों, खासकर केरल के ईसाई संस्थानों को डराने और नियंत्रित करने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं जो सामाजिक सेवा में लगे स्वैच्छिक संगठनों और संस्थानों पर नियंत्रण को और सख्त करेंगे।


 

 

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