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पटना: बिहार की कुर्सी छोड़ने से पहले नीतीश का बड़ा दांव! दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग, निशांत और नेक्स्ट सीएम पर टिकी नजरें

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर तो तय है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और राज्यसभा सदस्यता की शपथ के बीच जदयू ने 9 अप्रैल को दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई है। इसमें नेक्स्ट सीएम और निशांत कुमार को लेकर फैसला संभव है।

दिल्ली बैठक में जुटेंगे जदयू के दिग्गज नेता

दिल्ली में होने वाली इस बैठक में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) सहित पार्टी के सभी शीर्ष रणनीतिकार शामिल होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस मंथन का नेतृत्व करेंगे, जहां पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक मजबूती पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस्तीफे से पहले उत्तराधिकारी पर होगा फैसला?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले उत्तराधिकार की योजना स्पष्ट करना चाहते हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद के लिए नए विकल्पों पर चर्चा करना है। पार्टी चाहती है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में भी राजनीतिक संतुलन बना रहे।

दिल्ली में नीतीश की पार्टी की बैठक क्यों हो रही है?

  • नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे और राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगनी है।
  • हाल ही में राज्यसभा के लिए नीतीश निर्वाचित हुए हैं। 10 अप्रैल को उनके शपथ ग्रहण से पहले पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करना चाहती है।
  • बिहार में भाजपा और जदयू के गठबंधन वाली नई सरकार के गठन और कैबिनेट की रूपरेखा पर इस जेडीयू की इस बैठक में विस्तार से चर्चा होगी।
  • नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बाद जदयू के अस्तित्व और संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन होगा।
  • सत्ता ट्रांसफर के दौरान एनडीए के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना और किसी भी राजनीतिक अस्थिरता को रोकनामुख्य एजेंडा है।

राज्यसभा की शपथ से पहले बदलती रणनीति

नीतीश कुमार की राज्यसभा शपथ ने बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को हवा दी। दिल्ली में होने वाली ये बैठक नीतीश कुमार के इस्तीफे से ठीक पहले आयोजित की जा रही है। ऐसे में जदयू नेतृत्व ये सुनिश्चित करना चाहता है कि सहयोगी दलों के साथ तालमेल और संगठन की पकड़ किसी भी परिस्थिति में कमजोर न हो।

बिहार की भविष्य की राजनीति पर सबकी नजरें

बिहार की मौजूदा स्थिति काफी संवेदनशील है। गठबंधन के साथियों का रुख और विपक्ष की रणनीति को देखते हुए जदयू के लिए यह बैठक 'करो या मरो' जैसी साबित हो सकती है। 9 अप्रैल को दिल्ली में होने वाले फैसले यह तय करेंगे कि बिहार में नीतीश युग के बाद की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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