फतेहगंज पश्चिमी: गांव खिरका जगतपुर में साप्ताहिक श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन
फतेहगंज पश्चिमी संवाददाता मुदित प्रताप सिंह
फतेहगंज पश्चिमी। गांव खिरका जगतपुर में साप्ताहिक श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। मध्याह्न वेला में नैमिष धाम से आए कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री 'सरस' ने अपनी वाणी से रामकथा के अनेक प्रसंगों का संगीतमय गायन किया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
कथाव्यास ने कथा में माता सती द्वारा श्रीराम के भगवान स्वरूप पर शंका करने और सीता रूप में उनकी परीक्षा लेने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने भगवान शिव द्वारा पत्नी रूप में सती का त्याग करने और 87 हजार वर्षों की अखंड समाधि लगाने जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला।
आचार्य 'सरस' ने अपने प्रवचन में कहा कि माता-पिता, गुरु और संत की आज्ञा का बिना सोचे तुरंत पालन करना चाहिए। उन्होंने सचेत किया कि गुरु के वचनों पर अविश्वास करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान से सच्ची प्रीत करने वाला जन्म-मृत्यु के कष्ट सागर को भी पार कर लेता है।
दक्ष यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से क्षुब्ध होकर माता सती द्वारा यज्ञ कुंड में कूदकर भस्म हो जाने का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शास्त्री ने कहा कि धर्म की रक्षा हेतु यदि स्वयं की आहुति देनी पड़े तो भी संकोच नहीं करना चाहिए।
उन्होंने वीरभद्र द्वारा दक्ष के यज्ञ विध्वंस, सती के हिमाचल-मैना के घर में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म, शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप, शिव-पार्वती विवाह और शिव पुत्र स्वामी कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया।
इस अनुष्ठान में पूजन विधि का दायित्व आचार्य सतेंद्र दीक्षित कुशलतापूर्वक संभाल रहे हैं। संगीत में ढोलक पर राहुल, आर्गन पर दिनेश और घड़े पर रामरतन संगत दे रहे हैं।
आज के अनुष्ठान में मुख्य यजमान नत्थूलाल गंगवार पुजेरी, पूर्व प्रधान कृष्णपाल गंगवार, कवि-पत्रकार गणेश 'पथिक', हरिशंकर, जानकी प्रसाद, भूपराम, पूर्व प्रधान हरीश गंगवार, किशोर गंगवार, हरदयाल गंगवार और आचार्य सुनील कुमार सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और बच्चों की सक्रिय सहभागिता रही। कथा सत्र का समापन भगवान की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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