यूपी में सांसद-विधायकों को मिलेगा वीआईपी प्रोटोकॉल: अधिकारियों को उठकर करना होगा स्वागत, फोन न उठाने पर होगी कार्रवाई
मुख्य सचिव एसपी गोयल का शासनादेश जारी, योगी सरकार का सख्त संदेश, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर लगेगा आचरण नियमावली के तहत एक्शन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब सरकारी दफ्तरों में सांसद और विधायकों को पूरा सम्मान देना अधिकारियों के लिए अनिवार्य हो गया है। योगी सरकार ने इस संबंध में गुरुवार को नया शासनादेश जारी कर दिया है।
मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अगर कोई सांसद या विधायक किसी सरकारी कार्यालय में पहुंचते हैं तो अधिकारी को अपनी सीट से उठकर हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करना होगा। इतना ही नहीं, अधिकारी को उनसे पानी पूछने की औपचारिकता भी निभानी होगी।
फोन न उठाने पर भी अब नहीं चलेगी टालमटोल
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनप्रतिनिधियों का फोन आने पर अधिकारी को तुरंत कॉल रिसीव करनी होगी। यदि अधिकारी किसी बैठक या जरूरी प्रशासनिक काम में व्यस्त हैं तो उन्हें बाद में खुद पलटकर फोन कर जनप्रतिनिधि की समस्या का समाधान करना होगा।
सरकार ने साफ किया है कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर ‘उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में उठे मुद्दे के बाद सीएम योगी ने लिया सख्त फैसला
योगी सरकार ने यह कदम जनप्रतिनिधियों की तरफ से लगातार मिल रही उपेक्षा की शिकायतों के बाद उठाया है। पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा गरमाया था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन में अधिकारियों पर फोन न उठाने और जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि है। हर अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि जनप्रतिनिधियों को उचित तवज्जो और सम्मान मिले।
प्रशासनिक अमले में बढ़ी हलचल, अब बदलेगा काम का तरीका
इस शासनादेश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस आदेश से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। इससे आम जनता के काम भी तेजी से निपटेंगे।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए। अब जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई होगी।
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