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बरेली में एंबुलेंस माफिया का काला खेल बेनकाब: मरीज लाने पर 18 हजार तक की डील, हाथों में सोने की अंगूठी-ब्रेसलेट पहने दिखाते रोब

ठेकेदार बने करोड़पति’, निजी अस्पतालों में मरीज पहुंचाने का रेट फिक्स- प्रशासनिक अमला अलर्ट , आखिर ‘कब टूटेगा कमीशन का नेटवर्क’

बरेली में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला खेल सामने आया है। आरोप है कि शहर में एंबुलेंस नेटवर्क के जरिए मरीजों की खुलेआम खरीद-फरोख्त हो रही है। सूत्रों की मानें तो एंबुलेंस ड्राइवर अगर किसी बड़े निजी अस्पताल में मरीज लेकर जाता है तो उसे 5 हजार से 18 हजार रुपए तक कमीशन दिया जाता है। जितना गंभीर मरीज, उतनी बड़ी डील।

मरीज बना कमाई का जरिया, परिजनों से छुपाई जाती है सच्चाई

बताया जा रहा है कि सड़क हादसों, गंभीर बीमारियों और रेफर केस में मरीजों को सीधे उन्हीं अस्पतालों में पहुंचाया जाता है जहां से मोटा कमीशन तय होता है। कई बार मरीज के परिजनों को असलियत बताई ही नहीं जाती। मजबूरी में उन्हें उसी अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है जहां एंबुलेंस वाले की डील सेट है। इलाज बाद में, पहले सौदा पक्का होता है।

सोने की अंगूठी-ब्रेसलेट पहन दिखाते रोब, ठेकेदारों का साम्राज्य

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पता चला है कि इस पूरे सिंडिकेट के पीछे बड़े ठेकेदार और दलाल एक्टिव हैं। एंबुलेंस कमीशन के काले धंधे से इन लोगों ने करोड़ों की संपत्ति बना ली है।

हाथों में सोने की अंगूठियां और ब्रेसलेट पहनकर ये लोग अपना रोब दिखाते हैं। किसी का होटल कारोबार चल रहा है, कोई लग्जरी गाड़ियों में घूम रहा है, तो कोई रियल एस्टेट में पैसा खपा रहा है। मरीजों की मजबूरी इनकी अमीरी का जरिया बन गई है।

*स्वास्थ्य विभाग पर उठने लगे सवाल,सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर है। आखिर इतना बड़ा खेल चल रहा है और अफसरों को भनक तक नहीं? या फिर जानकारी होने के बाद भी आंख मूंद ली गई है? स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जनता पूछ रही है- क्या मरीज अब इलाज नहीं, सौदे का हिस्सा बन चुके हैं? क्या एंबुलेंस सेवा मानवता नहीं, कमाई का अड्डा बन गई है?

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