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गोविंदा आला रे आला...देशभर में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गोविंदा आला रे आला...देशभर में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सोमवार यानी आज पूरे भारत में भगवान कृष्ण के जन्मदिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी को मनाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में एकत्रित हुए। इस दिन पूरे उत्साह के साथ देशभर के मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। देशभर के सभी इस्कॉन मंदिरों में लोग कृष्ण दर्शन के लिए जुटे रहे हैं।

जन्माष्टमी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, प्राप्त होगी लड्डू गोपाल की कृपा

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वर्ष 2024 में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज यानी 26 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस दिन लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उपासना करने से कान्हा जी की कृपा प्राप्त होती है। चलिए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण (Janmashtami Vrat Katha) कैसे हुआ?

Shri Krishna Janmashtami: ब्रज में ठाकुरजी के गूंज रहे जयघाेष, जन्मस्थान पर आराध्य को सोम-चंद्रिका पोशाक अर्पित

Shri Krishna Janmashtami: ब्रज में ठाकुरजी के गूंज रहे जयघाेष, जन्मस्थान पर आराध्य को सोम-चंद्रिका पोशाक अर्पित नटवर नागर के 5251वें जन्मोत्सव पर खुशी की जो अनुभूति ब्रजवासियों को हो रही है उससे कम हजारों मील का सफर कर आए श्रद्धालुओं को भी नहीं। हर चेहरा दमक रहा है कान्हा के दर्शन की व्याकुलता आंखों में साफ दिखाई दे रही है। सोमवार को कान्हा का प्राकट्योत्सव है। ऐसे में उनकी नगरिया भी व्याकुल है।

Shani Pradosh Vrat 2024: शनि प्रदोष व्रत पर पूजा के समय करें मंगलकारी मंत्रों का जप, दूर होंगे सभी कष्ट

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सनातन धर्म में भाद्रपद माह का विशेष महत्व है। इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें संकष्टी चतुर्थी जन्माष्टमी दही हांड़ी प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat 2024) आदि कृष्ण पक्ष में मनाए जाते हैं। प्रदोष व्रत पर भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से मनचाहा वर प्राप्त होता है।

Janmashtami 2024: जन्माष्टमी की पूजा के दौरान करें इस स्तोत्र का पाठ, खुशियों से भर जाएगा आपका जीवन

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हर साल भादों माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण की विधिपर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही अंत में आरती कर भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि जन्माष्टमी की पूजा के दौरान श्री गोविंद दामोदर स्तोत्रम् का पाठ न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है।

जयंती योग में जन्मेंगे नंदलाल, पूजा से खुलेंगे समृद्धि के द्वार; बरेली के ज्योतिषाचार्य ने बताई पूजन विधि

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जन्माष्टमी इस बार जयंती योग में मनाई जाएगी। रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में होना बेहद शुभ है। पूजा के लिए सुबह स्नान करके संकल्प लें और चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर कलश स्थापित करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें और पूजा सामग्री रखें। खोए का प्रसाद ऋतु फल माखन मिश्री लें और घी का दीपक जलाएं। वासुदेव-देवकी नंद-यशोदा की पूजा करें।

Janmashtami 2024 Special Bhog: इन चीजों के बिना अधूरा है जन्माष्टमी का प्रसाद, अर्पित करने से मिलता है 56 भोग के बराबर फल

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जन्माष्टमी पर्व का हिंदुओं के बीच बड़ा महत्व है। यह भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2024) भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह 26 अगस्त 2024 दिन सोमवार को मनाई जाएगी तो चलिए कान्हा को प्रसन्न करने के लिए उनके मनपसंद भोग के बारे में जानते हैं।

जन्माष्टमी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, बरसेगी लड्डू गोपाल की अपार कृपा

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पंचांग के अनुसार इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार 26 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उपासना करने से कान्हा जी की कृपा प्राप्त होती है। चलिए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण कैसे हुआ?

Uttarakhand: पहली बार 6,564 मीटर ऊंची शिवलिंग चोटी पर गंगाजल से होगा जलाभिषेक, पर्वतारोही दल रवाना

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शिवलिंग चोटी का आरोहण करने वाला पर्वतारोही दल गोमुख से गंगाजल लेकर जाएगा जिससे आरोहण होने पर शिव को अभिषेक किया जाएगा। इस दल में एक विदेशी सहित चार पर्वतारोही शामिल हैं। दल शुक्रवार को भोजवासा पहुंच गया था। शनिवार को दल गोमुख होते हुए तपोवन पहुंचेगा। यह दल पर्वतारोहण कर 14 सितंबर तक गंगोत्री लौट आएगा।

Shani Dev Pujan: शनिवार के दिन इस नियम से करें भगवान शनि की पूजा, आय के खुलेंगे नए मार्ग

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शनिवार के दिन भगवान शनि की पूजा का विधान है। यह दिन रवि पुत्र की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनि देव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है जो लोग कर्मफल दाता को खुश करना चाहते हैं उन्हें शनिवार के दिन पीपल वृक्ष के समक्ष सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाना चाहिए।