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पितृमावस्था के उपलक्ष में सर्वधर्म सेवा समिति ने कराया विसर्जन एवं पितृ भोज

बरेली/कछला घाट,:- आज सर्वधर्म सेवा समिति के तत्वाधान में संस्थापक सचिव प्रवीण उपाध्याय एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुनीत जौहरी एडवोकेट संरक्षक ज्ञानेश साहू के नेतृत्व में आज पितृ अमावस्या के उपलक्ष में काफी समय से रखी लावारिस अस्थि विसर्जन एवं पितृ भोज कार्यक्रम गंगा कछला घाट पर पूर्ण आस्था के साथ संपन्न हुआ जिसमें हमारे सहयोगी चंद्रपाल, पंडित पप्पू शर्मा, राकेश कुमार शर्मा, आदित्य शंखधार, द्वारिका प्रसाद ,मेवाराम, सोमपाल, ऋषभ रस्तोगी, मुरारी आदीजन मौजूद रहे संस्था के संस्थापक सचिव प्रवीण उपाध्याय ने कहा विसर्जन एवं पितृ भोज कार्यक्रम हम सब पिछले 7 वर्षों से करते चले आ रहे हैं अगले वर्ष सिटी शमशान

शर्दिया नवरात्रि में मां दुर्गा को रोजाना अर्पित करें ये प्रिय फूल, चमक जाएगी आपकी फूटी किस्मत

आश्विन माह में शारदीय नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 03 अक्टूबर से होगा। वहीं इस त्योहार का समापन 11 अक्टूबर को होगा। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसे में आप रोजाना पूजा थाली में तरह-तरह के फूलों को शामिल करें। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होंगी।

मुस्लिम भक्त ने रखी थी मां दुर्गा के इस मंदिर की नींव, सच्चे मन से मांगी मुराद होती है पूरी; दिलचस्‍प कहानी

नवरात्रि 2024 मां दुर्गा के इस मंदिर की नींव एक मुस्लिम भक्त ने रखी थी। मंदिर की गुफा में आज भी माता की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित होती रहती है। मंदिर में मां की शक्ति रूप की पूजा होती है। नवरात्रों के पर्व पर मंदिर में माता के भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। यह मंदिर नजीबाबाद-बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

कोटद्वार। नजीबाबाद-बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुर्गा देवी मंदिर की नींव मां के एक मुस्लिम भक्त ने रखी थी।

सूर्य ग्रहण 2024: घटस्थापना से पहले करें इन चीजों का दान, नहीं पड़ेगा सूर्य ग्रहण का बुरा प्रभाव

हिंदू धर्म में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण की अवधि में कई सावधानियां रखनी होती हैं ताकि व्यक्ति इसके बुरे प्रभावों से बचा रहे। ऐसे में आज यानी बुधवार 02 अक्टूबर के दिन साल 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दर्शनीय नहीं होगा ऐसे में इसका सूतक काल भी भारत मान्य नहीं होगा।

दिवाली 2024: दिवाली की डेट को लेकर न हों कन्फयूज, जानें कब है धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज

हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर दिवाली मनाई जाती है। इस पर्व को भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली की डेट को लेकर लोग कन्फयूज हो रहे हैं। ऐसे में इस लेख में हम आपको बताएंगे धनतेरस दिवाली गोवर्धन पूजा और भाई दूज की सही डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में।

दिवाली के शुभ अवसर पर देशभर में खास रौनक देखने को मिलती है। इस पर्व के आने का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस त्योहार को भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण 14 साल का वनवास बिताने के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

मंगलवार को इस विधि से करें हनुमान जी की आरती, सभी मुरादें होंगी पूरी

सनातन धर्म में मंगवलार का दिन जीवन के संकटों को दूर और जीवन को खुशहाल बनाने के लिए उत्तम माना जाता है क्योंकि मंगवलार के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। मान्यता है कि सच्चे मन से उपासना करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और परिवार के सदस्यों को बजरंगबली की अपार कृपा प्राप्त होती है।

सर्वपितृ अमावस्या 2024: आ गया है पितरों के विदा होने का समय, इस कार्यों से तृप्त होकर लौटेंगे पितृलोक

इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 18 सितंबर से हुई थी जिसका समापन 02 अक्टूबर को होने जा रहा है। ऐसे में पितृ पक्ष का आखिरी दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का भी आखिरी मौका है। ऐसे में इस दिन पितरों को विदाई देते समय ये कार्य जरूर करने चाहिए।

मंगलवार को पूजा के दौरान करें हनुमत बीसा का पाठ, आर्थिक तंगी से मिलेगी निजात

सनातन शास्त्रों में निहित है कि मंगलवार के दिन हनुमान जी की भेंट मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से हुई थी। इसके लिए मंगलवार का दिन हनुमान जी को प्रिय है। इस दिन साधक राम परिवार संग हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं। बजरंगबली की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं।

Solar Eclipses 2025: अगले साल कब-कब लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं

आश्विन माह की अमावस्या को उत्तम माना जाता है क्योंकि यह तिथि पितृ पक्ष के अंतिम दिन पड़ती है। इसे सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को विधिपूर्वक विदा जाता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगेगा। चलिए जानते हैं इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण कब है?

हनुमान मंत्र: हनुमान जी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम

धार्मिक मत है कि राम भक्त हनुमान जी की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हनुमान जी की पूजा करने से कुंडली में मंगल मजबूत होता है। इसके लिए साधक भक्ति भाव से मंगलवार के दिन रामजी के परम भक्त हनुमान जी पूजा करते हैं। इसके साथ ही मंगलवार का दिन व्रत रखा जाता है।